गाँधी

मनीष पटेल 

गाँधी भारत के बाहर सबसे ज़्यादा जाने जाने वाले शख़्सियत हैं। गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। गांधी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे।उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई ब्रिटिश-भारत में की। बाद में, वे वक़ालत की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। वहाँ से लौटकर वे दक्षिण अफ़्रीका गए। वहाँ उन्होंने वक़ालत की शुरुआत की। गाँधी पेशे से एक वक़ील थे। दक्षिण अफ़्रीका में रहते हुए उन्हें सबसे पहले अंग्रेज़ों द्वारा कुछ भेदभाव का सामना करना पड़ा।

 

दक्षिण-अफ़्रीका से वापस लौटने के बाद वे सक्रिय रूप से भारत की आज़ादी के आंदोलन से जुड़ गये। वे कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख सदस्य थे। गाँधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते भारत को आज़ाद कराने का रास्ता चुना।

 

गाँधी एक सहज व्यक्तित्व के आदमी थे। वे आत्मनिर्भर होने की बात करते थे। वे अपने सारे काम ख़ुद करते थे। वैसे काम, जिन्हें आमतौर पर, नौकर-चाकर करते हैं। वे प्रतिदिन सुबह उठते थे। अपने हाथ से चक्की पर आटा पीसते थे। इस काम में कस्तूरबा गाँधी (उनकी पत्नी) हाथ बाँटती थीं। गाँधी सवेरे की प्रार्थना के बाद रसोई-घर में जाकर सब्ज़ियाँ छीलते थे। गाँधी के आस-पास रहने वाले लोग खाने के बाद अपना खाना बर्तन ख़ुद माँजते थे। वे अपने बाग़ीचे में फल और सब्ज़ियाँ ख़ुद उगाते थे। वे अपने घर में झाड़ू ख़ुद लगते थे। वे अपना बाथरूम स्वयं साफ़ करते थे। वे चरख़ा चलकर कपड़े बुनते थे। उनके पास एक बकरी थी। इस बकरी की देखभाल भी वे करते थे।

 

एक बार, गाँधी प्रवासी भारतीयों की बातों के ब्रिटिश सरकार के सामने रखने के लिए लन्दन गये। वहाँ के भारतीय छात्रों ने उन्हें खाने पर बुलाया। दोपहर में, छात्र-छात्रायें खाना बनाने लगे। दो बजे के आस-पास वहाँ एक दुबला-पतला आदमी आया। वह आदमी बर्तन धोने और सब्ज़ियाँ साफ़ करने में मदद करने लगा। कुछ देर बाद, वहाँ का छात्र नेता आया। जिसने, गाँधी को खाने पर बुलाया था। उसने, देखा की यह दुबला-पतला आदमी गाँधी ही है।

 

गाँधी को बच्चों से बहुत प्रेम था। अपने बच्चे की देखभाल वे ख़ुद करते थे।

गाँधी को अपने आश्रम में नौकर रखने की ज़रूरत पड़ी। क्योंकि, उनके ज़्यादातर साथी जेल चले गए। ऐसे में, तमाम कामों को करवाने के लिए किसी हरिजन* को रखने का वे आग्रह करते थे। गाँधी लिखते हैं कि, "मैं कभी किसी को अपना नौकर नहीं समझता। उसे भाई या बहन ही मानता हूँ। मैं आप लोगों को भी अपना भाई समझता हूँ।"

 

गाँधी की सीमायें :

गाँधी छुआछूत (untouchability) ख़िलाफ़ थें लेकिन वर्ण व्यवस्था (Caste System) के प्रबल समर्थक थें।

 

डॉ. और महात्मा का द्वंद्व :**

भारत में डॉ. आम्बेडकर और महात्मा गाँधी को अक्सर आमने-सामने रखकर बात की जाती है । जहाँ दोनों की वैचारिक पक्षधरता पर विचार किया जाता है। डॉ. आम्बेडकर, गाँधी से अलग वैचारिक भूमि तैयार कर रहे थें। जहाँ गाँधी जाति व्यस्था का समर्थन कर रहे थे वहीं डॉ. आम्बेडकर जाति के विनाश (annihilation of caste) की बात कर समतामूलक समाज बनाने की वक़ालत करते हैं।

 

* गाँधी अछूत (दलित) की जगह हरिजन शब्द का इस्तेमाल करते थे। अब यह एक असंवैधानिक शब्द है। जिसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

** इस विषय पर हम बातचीत डॉ. आंबेडकर पर एक ब्लॉग लिखकर करेंगे।

 

References :
नौकर (2005), अनु बंधोपाध्याय
स्वतंत्रता की ओर (2010), सुभद्रा से गुप्ता, अनुवाद: मनीषा चौधरी